
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का स्पष्ट संदेश: ‘बेंच हंटिंग’ रोकने वाला सर्कुलर, जजों के विवेक पर नहीं डालता दबाव
बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ‘बेंच हंटिंग’ को रोकने के लिए जारी सर्कुलर पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि यह किसी जज के लिए सुनवाई से खुद को अलग (recusal) करना अनिवार्य नहीं बनाता। कोर्ट ने कहा कि सर्कुलर का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखना है, न कि न्यायिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करना।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हर बेंच को अपने विवेक से निर्णय लेने का अधिकार है कि किसी मामले में सुनवाई करनी है या खुद को अलग करना है। सर्कुलर केवल एक सावधानी (note of caution) के रूप में जारी किया गया है ताकि कोई पक्ष अपने हित में विशेष बेंच चुनने की कोशिश न कर सके।
दरअसल, हाल के कुछ मामलों में ‘बेंच हंटिंग’ यानी पसंदीदा बेंच के सामने केस लगाने की कोशिशों की आशंका सामने आई थी। इसी को रोकने के लिए यह सर्कुलर जारी किया गया था। कोर्ट ने कहा कि इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि न्यायालय अनजाने में किसी पक्ष के हितों का साधन न बन जाए।
हाईकोर्ट ने यह भी दोहराया कि न्यायाधीशों की स्वतंत्रता सर्वोपरि है और सर्कुलर किसी भी तरह से उनके अधिकारों को सीमित नहीं करता। जरूरत पड़ने पर जज अपने विवेक से recusal का फैसला ले सकते हैं।
हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि ‘बेंच हंटिंग’ रोकने के लिए उठाए गए कदम न्यायिक व्यवस्था की पारदर्शिता और निष्पक्षता को मजबूत करने के लिए हैं, न कि जजों की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने के लिए।






