बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में मौसेरे भाई-बहन के बीच हुए विवाह को हिंदू कानून के तहत अमान्य (शून्य) घोषित कर दिया है। अदालत ने जांजगीर-चांपा के मामले में फैमिली कोर्ट के फैसले को पलटते हुए यह स्पष्ट किया कि ऐसे संबंध “निषिद्ध रिश्तों” की श्रेणी में आते हैं।
दरअसल, फैमिली कोर्ट ने स्थानीय सामाजिक प्रथा का हवाला देते हुए विवाह को वैध माना था। लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी प्रथा को कानूनी मान्यता तभी मिल सकती है, जब वह प्राचीन, निरंतर और सार्वजनिक नीति के अनुरूप साबित हो। इस मामले में ऐसे प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए जा सके, इसलिए प्रथा का तर्क खारिज कर दिया गया।
मामला वर्ष 2018 का है, जब जांजगीर-चांपा जिले में एक युवक ने अपनी मौसेरी बहन से विवाह किया था। बाद में विवाद होने पर पति ने अदालत में याचिका दायर कर विवाह को शून्य घोषित करने की मांग की। उसने तर्क दिया कि दोनों की माताएं सगी बहनें हैं, जिससे यह विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत अवैध है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 5(4) का हवाला देते हुए कहा कि निषिद्ध संबंधों में विवाह मान्य नहीं होता और ऐसा विवाह प्रारंभ से ही शून्य माना जाएगा।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विवाह शून्य घोषित होने के बावजूद प्रभावित पक्ष को भरण-पोषण (स्थायी गुजारा भत्ता) का अधिकार मिलेगा, जिससे न्यायिक संतुलन बना रहे।
यह फैसला हिंदू विवाह कानून की व्याख्या को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है और भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक स्पष्ट कानूनी दिशा तय करता है।






